मोह-माया

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श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान के शव को लकड़ियों पर रख दिया गया। एक बुजुर्ग बोले सामग्री रख मुँह अर छात्ति पै। मलखान के बेटे सुधीर ने चादर हटाई, मलखान के साँवले चेहरे पर रोबदार मुछें उसके जीवन चरित्र को प्रतिबिम्बित कर रहीं थी। तभी लोगो की भीड़ मे से एक बुजुर्ग ने ताना मारा “मरते के पिछवाड़े पै घी रगड़ दो, दिखान कु कि घी खुला-खुला कै पाला हा” भीड़ मे बहुत से लोगो ने उसे इसके लिए टोका, लेकिन अधिकतर चेहेरो के भाव उसके ताने का