चोर मचाए शोर - 1

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गरमी की छुट्टी लगते ही बनैला गांव के स्कूली बच्चे बोर होने लगे थे। उन्हें किसी काम में मजा नहीं आ रहा था। न बाटी-भौंरा, पिट्ठूल, लुका-छाई, पतंग उड़ाई में और न ही दादा-दादी के किस्से-कहानियों में।ऊपर से उनके खास दोस्त, विवेक व विजय अपने मामा के घर जा चुके थे। वे स्कूल खुलने पर ही लौटकर आनेवाले थे।खेती चूंकि असिंचित थी, इसलिए गरमी के मौसम में खेतों में उनके लिए कुछ काम न था।वे एक-दो बार अपने-अपने पालकों के साथ जंगल में महुआ व साल बीज बीनने और चिरौंजी व आंवला तोड़ने के लिए गए भी, पर वहां भालू