घुँघरू - 7

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अनन्त देव की सहायता से मैंने उसके रहने की व्यवस्था जंगल के निकटतम गाँव वाराही में कर दी। घुँघरू अतीव सुन्दरी थी, गर्वीली - गुणवंत  और बहुत पैनी बुद्धि वाली थी। मैं उसके मोह में पड़ गया था। इस मोह में अंधा होकर मैंने कभी सोचा ही नहीं कि हमारे सनातन धर्म में ऐसी युवा स्त्री या तो सुहागन होती है या विधवा। फिर घुँघरू क्या है ? घुँघरू के प्रति प्रेम अत्यंत वेगमय था, आंखों पर पट्टी बंध गई ...  मैं प्रतिदिन सोचता की चलूँ घुँघरू को नयन भर देख आऊं, कभी जाता तो कभी संकोच वश थम जाता।