अगर मै नास्तिक हूं तो मेरा कर्म है खुद को पहचानूं अगर तुम खुद को पहचान ही नहीं रहे हो तो तुम नास्तिक हो ही नहीं सकते क्योंकि नास्तिक वो नहीं होता जो भगवान को नहीं मानता नास्तिक वो है जो खुद है जानता जिस आप सब भगवान को खोजने निकले हो बाहर की दुनियां में असल में वो है ही नहीं इस दुनिया में अगर इस दुनियां में होता तो भगवान की पूजा नहीं करनी पड़ती उसके पास चलकर जाना पड़ता अपने दुखों को बताना नहीं वो आपको देखकर आपके दुखों को बताते इसलिए मनुष्य को अपने अंदर के