Saarghaa - 4

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Episode:-4  बातें जो दिल तक गईंरात गहरी हो चुकी थी। बाहर बारिश अब तेज़ नहीं थी, बस धीरे-धीरे टपक रही थी। मिट्टी के घर की छत से पानी टपक कर कोने में रखी बाल्टी में गिर रहा था - टिप-टिप  अंदर चूल्हे में आग जल रही थी। उसकी लाल रोशनी में दोनों के चेहरे चमक रहे थे। अभ्यंकर और सारघा, दोनों ज़मीन पर बैठे थे, बीच में दो कुल्हड़ रखे थे, जिनसे हल्का-हल्का धुआँ उठ रहा था बहुत देर तक कोई कुछ नहीं बोला। फिर अभ्यंकर ने ही चुप्पी तोड़ी। आज उसके अंदर कुछ था जो बाहर निकलना चाहता था।"सारघा...""हाँ?""तुम्हें