मंजिले - भाग 54

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                  समय बहुत कुछ सहारा होगा लेखक ने, तभी वो समय को जान सका शायद यही एक कारण होगा। एक मुस्कुराहट के पीछे कितने दुख होंगे... कोई नहीं जान सकता... खुशी किसे कहते हो... लूट जाने के बाद ---शायद हर कोई हार को ही जीत समझ रहा होगा।                               मै दूर हुँ काफ़ी, शहर से दूर... वहा सिर्फ ऐटिटूडही है बंदे की कोई नेकी नहीं देखि जाती... याद रखो जो इनसे दूर है उसको कया कहते होगे... सिर्फ बहुत