गुज़र होता था कभी कभी उस टाहली के पास से,यहां मेरे बापू और भाई से बदला लिया था... उसे कुहाड़ी से काट दिया था.. पर बापू की तो गर्दन ही उड़ा दी थी, मेरे भाई की बाजू काट दी थी,पर उसने भी दुश्मन शरीक का कुछ नहीं छोड़ा था... पर बचाव मे भी उसे जेल तो हो ही गयी थी... उसकी एक बाजू बाई नहीं थी... पर हमारा निक्मा कानून बचाव मे भी जेल तो भेज ही देता है... कुछ भी हो। आज उसकी रहायी थी... बहुत खुश था बलजार। उसके छोटे ने घर आना था। ठीक टाइम के शाम को