इन्तजार

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. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकारी नौकर। उसको किसी का हाल-ए-दिल महसूस करने से क्या फायदा।मयंक और निशा को अफसोस तो बहूत हुआ। मिलने के सिमित समय की पाबंदी में भी अधिकतर समय एक दुसरे को देखते हुए बीता। न निशा ने बात की शुरूआत की और न मयंक ने ही कुछ कहना प्रारम्भ किया। हाँ इतना जरूर था कि सलाखों के अन्दर मयंक और