रिश्तों का एहसास

एक ऐसा सफर, जिसमें मंजिल से ज्यादा रास्ते ने सिखायापूरनपुर की सुबह में एक अलग ही अपनापन था।सूरज निकलने से पहले ही खेतों की पगडंडियों पर लोगों के कदमों की आहट सुनाई देने लगती थी। कहीं किसान अपने बैलों के साथ खेत की तरफ निकल रहा होता, कहीं कोई मजदूर अपने कंधे पर औजार रखे काम की तलाश में जा रहा होता और कहीं किसी छोटे-से घर के आँगन में चूल्हे से उठता धुआँ बता देता कि किसी माँ ने अपने परिवार के लिए दिन की शुरुआत कर दी है।पूरनपुर के आसपास बसे गाँवों में जिंदगी बहुत साधारण थी, लेकिन