अति चिंतन

मंजू आज सुबह से ही बहुत थकी हुई महसूस कर रही थी। वैसे तो उसे नींद बहुत कम आती थी, पर आज तो आंखें खोलने का भी मन नहीं हो रहा था।पति और बच्चों को स्कूल-ऑफिस भेजकर वह बिस्तर पर जा गिरी और गिरते ही उसे नींद आ गई। बेड के ठीक सामने दीवार पर घड़ी टंगी थी।हर दस मिनट में उसकी आंख खुलती। घड़ी देखती और मन में चिंता शुरू - "अभी तो कपड़े धोने हैं, दोपहर का खाना बनाना है, बच्चों को स्कूल से लाने जाना है। मैं ऐसे कैसे सो सकती हूँ।" बस घड़ी देखती और फिर