अनुरागिनी का रहस्यमय वचन अध्याय 1: पीपल का चबूतरा, हुक्के की गुड़गुड़ और वहम की रातउस रात मोनू सिर्फ अपनी माँ की आवाज़ सुनना चाहता था।उसे नहीं पता था कि उस एक आवाज़ की तलाश उसे ऐसी चीज़ के सामने खड़ा कर देगी, जो शायद बहुत पहले से उसी पर नज़र रखे हुए थी।चैत का महीना बीतने को था। शाम ढलते ही गाँव की पगडंडियों पर एक अजीब-सी सिहरन रेंगने लगती थी।गाँव के बीचों-बीच पुराने शिव मंदिर के बाहर पीपल का विशाल पेड़ था। उसके नीचे बने चबूतरे पर रोज़ की तरह अलाव जल रहा था। बूढ़े-बुजुर्ग अपनी मैली धोतियों को