रोशनी की दस्तक - 1

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भाग 1: अनदेखा दीयारघुनाथ जी की हवेलीनुमा पुरानी हवेली की दीवारें अब सिर्फ ख़ामोशी की गवाही देती थीं। ढलती शाम के साथ जब गाँव की गलियों में चिड़ियों का शोर थमता, तब रघुनाथ जी के घर में पसरा सन्नाटा और गहरा हो जाता। दो विशाल कमरे, एक ढलवां छत वाला पुराना वेरांडा और दीवारों पर टंगी कुछ पुरानी तस्वीरें—यही उनकी कुल दुनिया बन चुकी थी। तस्वीरों में मुस्कुराते चेहरे उनके दोनों बेटों के थे, जो सालों पहले शहर जाकर बड़े साहब बन चुके थे। अब तो वे विदेशी उड़ानों और ऊंचे ओहदों में इतने व्यस्त थे कि रघुनाथ जी का