पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" वैसे भी हम भारतीय गन्दगी फैलाने में कम नहीं। जहाँ-तहाँ थूक देंगे या कूड़ा फेंक देंगे।नैनीताल को जैसे ही छूता हूँ, एक सिहरन सी दौड़ने लगती है, शरीर में।आँखों में चमक।वाल्मीकि रामायण में वाल्मीकि ने रामचन्द्र जी से युद्व कांड में कहलाया है," जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।" युद्ध के बाद लक्ष्मण जब राम जी से कहते हैं ," लंका अति सौन्दर्यमय और