उपहार

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उपहारलेखक: विजय शर्मा एरीज़िंदगी में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जो महँगी दुकानों में नहीं मिलतीं। वे न तो सोने-चाँदी से बनती हैं, न ही चमकदार पैकेट में आती हैं। वे दिल से निकलती हैं और दिल तक पहुँचती हैं। यही असली उपहार होता है।यह कहानी है एक साधारण परिवार की, एक साधारण बाप की और एक साधारण सी बेटी की—जिसने सिखाया कि उपहार का असली मतलब क्या होता है।पंजाब के एक छोटे से कस्बे में रामप्रसाद का परिवार रहता था। रामप्रसाद सरकारी स्कूल में चपरासी थे। तनख्वाह कम थी, लेकिन इज्जत और मेहनत से घर चलता था। उनकी पत्नी