हैवान - एपिसोड 1

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उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही जूतों की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।​गाँव के बुज़ुर्ग हमेशा कहते थे—सूरज ढलने के बाद 'भैरव घाटी' के जंगल में कदम मत रखना। पर नील की मजबूरी थी। उसकी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और शहर से दवा लेकर लौटने का यही एकमात्र छोटा रास्ता था।​वह पगडंडी से बस कुछ ही फासले पर था, जब अचानक हवा का रुख बदला। फिज़ा में