ध्रुव की ताराभाग - १९लेखिका "अनामिका"ट्रेन के लंबे सफर के बाद जैसे ही ध्रुव और तारा अपनी कॉलोनी में पहुँचे, दोनों के चेहरों पर अपने घर लौटने की खुशी साफ झलक रही थी। दोनों अपने-अपने घर की तरफ बढ़ गए।तारा ने जैसे ही अपने घर का दरवाज़ा खटखटाया, उसकी माँ ने दरवाज़ा खोला और तारा को सामने देखकर खुशी से गले लगा लिया।"तारा! मेरी बच्ची, आ गई तू!" माँ ने उसके माथे को चूमते हुए कहा, फिर बाहर झाँककर झिझकते हुए पूछा, "तू अकेली ही आई है क्या इतनी दूर से?"तारा ने अपनी वही जानी-पहचानी शरारती मुस्कान के साथ कहा,