बस में खड़ा हिमालय

(50)
  • 1.1k
  • 405

यात्राएँ कभी-कभी जीवन को देखने की दृष्टि बदल देती हैं।मेरी यह यात्रा भी आरंभ में ऐसी नहीं थी। यह तो बस एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने की साधारण-सी यात्रा थी।इस मार्ग से मेरा परिचय नया नहीं था। बचपन से लेकर आज तक मेरी सबसे अधिक यात्राएँ इसी रास्ते की बसों में बीती थीं। यहाँ के दृश्य मेरे लिए परिचित थे—भीड़, प्रतीक्षा, धक्का-मुक्की और सीट पाने की व्याकुलता भी। इसलिए उस दिन की यात्रा में कुछ असाधारण होने की मैंने कोई अपेक्षा नहीं की थी।पर कभी-कभी सबसे परिचित रास्ते ही हमें सबसे अप्रत्याशित अनुभव दे जाते हैं।उस दिन भी