घुँघरू - अंतिम अध्याय

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आखिर वह दिन आ गया जब इस कहानी का आखिरी पड़ाव हम सब का इंतज़ार कर रहा था ।  यह अमावस की घनी - काली रात थी, ऐसा माना जाता है कि अमावस की रात काली शक्तियां सबसे ज्यादा सक्रिय होतीं हैं ... शायद इसलिए प्रोफेसर शास्त्री ने इस रात को साधना के लिए चुना था। सर्द रात के बावजूद सिंहल पैलेस के खुले गार्डन में सब जमा थे, सच कहूँ तो मैं तो डर के मारे आना भी नहीं चाहती थी पर शर्लिन के वास्ते मुझे आना पड़ा। गार्डन में मेरे अलावा स्वप्निल, शर्लिन, डॉ. पार्थसारथी, गौतम देव रॉय