ध्रुव की तारा - भाग 22

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ध्रुव की ताराभाग - २२लेखिका "अनामिका" ​ध्रुव लगातार बोले जा रहा था, "तारा, प्लीज शांत हो जाओ... अगर तुम्हें मेरी बात बुरी लगी तो मुझे माफ कर दो, हम पहले की तरह ही अच्छे दोस्त रहेंगे।" उसकी आँखों में अपनी सबसे प्यारी दोस्ती खोने का डर साफ़ झलक रहा था।​तारा उसे घबराहट में सफाई देते देखती रही, फिर आंसुओं के बीच उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई। जब ध्रुव का बोलना बंद ही नहीं हो रहा था, तो तारा ने बिना कुछ सोचे हिम्मत जुटाई, आगे बढ़ी और ध्रुव के गाल पर अपने होंठ रख दिए।​पार्क का सन्नाटा