अन्तर्निहित - 61

[61]सरिता शीला से उतरने ही वाली थी कि सहसा रुक गई। शैल के तर्क ने उसके चित्त को विचार करने के पर विवश कर दिया। सोचने लगी, ‘सनातन विचारधारा कितनी विशाल और गहन है! अब तो मैं भी मुस्लिम सारा से सनातनी सरिता बन चुकी हूँ किन्तु अभी मेरा वह मुस्लिम संस्कार नष्ट न होने से मैं मछलियाँ खाने को तत्पर हो गई। मुझे उन संस्कारों का त्याग करना होगा। जब तक वे संस्कार रहेंगे, मैं सनातनी कैसे बन सकती हूँ। सारा से सरिता कैसे बन सकती हूँ?’“मैं भी मांसाहार नहीं करूंगी। कभी नहीं। इसी समय से मैं उसका त्याग