लफ़्ज़ों से लबों तक

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मातृभारती ऐप की दुनिया शब्दों, कविताओं और अहसासों से भरी थी। मयूर अक्सर अपनी लिखी पंक्तियाँ वहाँ साझा करता था, जहाँ लफ़्ज़ कम और जज़्बात ज़्यादा होते थे। एक शाम, जब उसने अपनी एक अधूरी नज़्म पोस्ट की, तो कुछ ही मिनटों में एक लाइक और बेहद ख़ास टिप्पणी आई। नाम था—अनामिका। अनामिका की उस एक टिप्पणी ने मयूर के दिल को छू लिया; ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी रूह में झाँककर बात समझ ली हो।इसके बाद एक खूबसूरत सिलसिला शुरू हुआ। हर रोज़ एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ना, उन पर दिल से प्रतिक्रिया देना और फिर इनबॉक्स में