सर्वगुण संपन्न बहु चाहिए

शारदा देवी अस्सी साल की थीं, पर उनकी कमर आज भी सीधी थी और आवाज में वही रौब था जो चालीस साल पहले हुआ करता था। गली-मोहल्ले की औरतें उन्हें देखकर फुसफुसातीं, "शारदा देवी बेटों की माँ कम, उनकी किस्मत की जेलर ज्यादा हैं।"उनके दो बेटे थे। बड़ा सुरेश, पैंतालीस साल का। पढ़ाई में मन न लगा, दसवीं में दो बार फेल हुआ और अब बाजार में एक छोटी सी मोबाइल रिपेयर की दुकान पर नौकरी करता था। चेहरा भोला, स्वभाव नरम। छोटा नरेश, चालीस साल का। उसने शहर के ही किसी प्राइवेट कॉलेज से जैसे-तैसे एमटेक कर लिया था