वह पर्स

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शीर्षक: “वह पर्स”कभी-कभी रास्ते में पड़ी चीज़ सिर्फ सामान नहीं होती… किसी की पूरी उम्मीद होती है।--- प्रस्तावनाहम अक्सर सोचते हैं कि इंसानियत के लिए बहुत बड़ा आदमी होना जरूरी है।बहुत पैसा होना चाहिए।बहुत बड़ी संस्था होनी चाहिए।बहुत बड़ा दान करना चाहिए।लेकिन सच तो यह है कि इंसानियत के लिए कभी-कभी सिर्फ एक साफ दिल और सही फैसला चाहिए।सड़क पर पड़ा हुआ कोई सामान देखकर हममें से अधिकांश लोग शायद आगे बढ़ जाएँ।कोई सोचता है—“जिसका होगा, वह ढूँढ लेगा।”कोई सोचता है—“मुझे क्या लेना-देना?”और कोई ऐसा भी होता है, जो रुक जाता है।वह उस चीज़ को सिर्फ वस्तु नहीं समझता।वह