सन्यासी -- भाग - 33

  • 498
  • 156

डाक्टर अरुण को हँसता हुआ देखकर जयन्त बोला...."डाक्टर साहब! मेरी बहन को भी ऐसे ही हँसाते रहिएगा,कभी भी उसका साथ मत छोड़िएगा","आप बेफिक्र रहे जयन्त बाबू! ऐसी नौबत कभी नहीं आऐगी कि आपको शिकायत करने का मौका मिले" डाक्टर अरुण बोले..."मैं ऐसी ही आशा रखता हूँ आपसे",जयन्त बोला..."जी! और मैं आपकी आशाओं पर सदैव खरा उतरने की कोशिश करूँगा",डाक्टर अरुण बोले..."अच्छा! एक बात तो बताइए",जयन्त ने डाक्टर अरुण से पूछा..."जी! कहिए",डाक्टर अरुण बोले...."आपके माता पिता तो स्वीकार कर लेगें ना मेरी बहन को,कहीं आपकी माता जी मेरी बहन को ये कहकर ना ठुकरा दें कि हमारे ब्राह्मण परिवार में क्षत्रिय