बिहार…गंगा के किनारे बसे बिहार के एक छोटे से जिले से करीब पैंतीस किलोमीटर दूर एक गाँव था—देवपुरा।नाम भले ही देवपुरा था, लेकिन गाँव की हालत किसी से छिपी नहीं थी।चारों तरफ दूर-दूर तक फैले खेत… कहीं धान की फसल लहरा रही थी तो कहीं सूखी पड़ी जमीन किसान की मजबूरी की कहानी कह रही थी। गाँव तक पहुँचने वाली सड़क आधी पक्की और आधी कच्ची थी। बरसात के दिनों में वही रास्ता कीचड़ से इतना भर जाता कि मोटरसाइकिल तो दूर, पैदल चलना भी किसी परीक्षा से कम नहीं लगता।गाँव में बिजली आती भी थी तो कभी-कभी।रात में कई