दोपहर ढल चुकी थी, लेकिन सेंट जेवियर्स कॉलेज के गलियारों में तनाव की एक खामोश परत तैर रही थी। नोटिस बोर्ड के पास की भीड़ तो धीरे-धीरे छंट गई थी, पर सिया के चेहरे का रंग अब भी नहीं लौटा था। वह पत्थर की पुरानी सीढ़ियों पर अपने घुटनों में सिर छिपाए बैठी थी। उसकी दोस्त तन्वी उसके कंधे पर हाथ रखे बार-बार कुछ समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सिया के कानों तक आवाजें नहीं, सिर्फ अपने दिल की घबराई हुई धड़कनें पहुंच रही थीं।थोड़ी ही दूरी पर, बरगद के पेड़ की आड़ में खड़ा आदित्य अपनी उंगलियों