कर्त्तव्य

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  भयंकर गर्मी से निजात पाने के लिए सब अपने-अपने तरह से कोशिश कर रहे थे। सुर्यदेव की उग्रता के सामने सब नतमस्तक थे। आलम यह था कि सुर्यदेव जो सुबह उग्र होते थे तो उनका गुस्सा शाम को ही शांत होता था। इतनी भयानक गर्मी और उस पर चलने वाली गर्म हवा, ऐसा लग रहा था कि मानो हड्डी में छेद कर देगी, सारे लोग अपने अपने काम में लगे हुए थे। उन्हीं लोगों में एक मनोहर था जो साईकिल चलाकर अपने गन्तव्य स्थान तक पहूंचने को आतूर था। कभी साईकिल की रफ्तार इतनी धीमी हो जाती थी ,