Devil की दास्तान - 57

  • 285
  • 90

(सन्नाटा… बाहर बारिश धीरे-धीरे गिर रही है। कमरे में हल्की पीली लाइट जल रही है। सिमरन अब सच जान चुकी है — कि वो “सीया” नहीं बल्कि “सिमरन” है। करन उसके सामने बैठा है… उसकी आँखों में डर, पछतावा और टूटन साफ़ झलक रही है।)(उसकी आँखों में आँसू भरे हैं, होंठ काँप रहे हैं।।वो बोलने की कोशिश करता है पर शब्द नहीं निकलते।)करन (टूटे हुए स्वर में) बोला - “सिमरन… अब… अब तुम चली जाओगी ना…तुम मुझे छोड़ दोगी…”(वो धीरे-धीरे सिमरन के पैरों के पास बैठ जाता है, जैसे एक बच्चा गलती के बाद माफ़ी माँग रहा हो। सिमरन उसे देखती