अध्याय 4 : जबरदस्ती की शादी"शादी? किसकी शादी?" नित्या बेड से उछल कर खड़ी हो गई।रुद्र ने फोन काटा और उसकी तरफ मुड़ा। सिगरेट अभी भी उसके होंठों में थी।"हमारी। तेरी और मेरी।" उसने बड़े ही आराम से कहा, जैसे वो सब्जी लाने की बात कर रहा हो।"तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है! मैं तुमसे शादी क्यों करूँगी? मैं तुम्हें जानती भी नहीं हूँ!" नित्या चीखी।रुद्र धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने सिगरेट बुझाई और नित्या की ठुड्डी पकड़ कर ऊपर उठाया।"जानती नहीं है तो जान जाएगी। पूरी जिंदगी पड़ी है जानने के लिए। पंडित सुबह 7 बजे आएगा।""मैं नहीं करूँगी!