ध्रुव की ताराभाग - ३०लेखिका: अनामिकाध्रुव के जाने का दिन देखते ही देखते आ पहुँचा।कॉलोनी के बाहर गाड़ी की डिग्गी में बिजय जी उसका सामान रख रहे थे। वहीं पास खड़े आनंद जी, सुधा जी और सुमन जी उसे लगातार हिदायतें दिए जा रहे थे—अपनी सेहत का ख्याल रखना, सही से रहना और शादी की तारीख तय होते ही छुट्टी लेकर तुरंत आ जाना।तारा एक कोने में खामोश खड़ी यह सब देख रही थी। ध्रुव भले ही कहने को सभी से बातें कर रहा था, लेकिन उसकी नज़रें लगातार तारा पर ही टिकी थीं। सुमन जी ने यह बात भांप