कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध - 6-7

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शोक की परछाईं और पत्थर का मौनप्रिंस अल्बर्ट की मृत्यु के बाद बकिंघम पैलेस के वैभव पर जैसे किसी ने काली चादर डाल दी थी रानी विक्टोरिया ने खुद को बाहरी दुनिया से काट लिया और कोहिनूर वाला वह ब्रोच अब उनकी मेज पर धूल फांकने लगा महल के नौकर फुसफुसाते थे कि रानी जब भी उस हीरे को देखती हैं, उन्हें अल्बर्ट की मुस्कुराती हुई तस्वीर याद आती है कोहिनूर की वह नई, तीखी चमक अब उत्सव की नहीं, बल्कि एक श्मशान जैसी खामोशी की गवाह थीरानी ने आदेश दिया कि पैलेस के सारे झंडे आधे झुका दिए जाएं