कहानी - पीहू की नई उड़ानसमय बहुत तेजी से बदलता है। समय के गर्भ में क्या छुपा है, कौन जानता है।वही मासूम सी पीहू, जो कभी तारों में कहानियाँ खोजा करती थी, आज एक रूढ़िवादी परिवार की बहू थी। गाँव के उस घर में उसकी शादी हुई थी, जहाँ औरत का काम सिर्फ सहना माना जाता था।उसका पति स्वभाव से कठोर था। अपने परिवार को खुश रखने के लिए वह अक्सर सबके सामने पीहू का अपमान कर देता। कभी उसे नीचा दिखाता, कभी खरी-खोटी सुनाता। उसकी माँ के सामने तो वह ऐसा व्यवहार करता जैसे पीहू का कोई अस्तित्व ही