दास्ताँ-ए-मोहब्बत कुछ मुलाक़ातें तक़दीर का पैग़ाम बन जाती हैं,कुछ अनजान सूरतें दिल में सवाल बन जाती हैं।कहाँ मालूम था उस रात दोनों को,कि एक छोटी-सी मुलाक़ात उनकी कहानी बन जाएगी। रात के 8:40 बजे | शहर की सुनसान सड़करात का वक़्त था।शहर की चमचमाती सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम होने लगी थी। ऊँची इमारतों के बीच से गुज़रती एक सुनसान सड़क पर काली मर्सिडीज़ तेज़ी से आगे बढ़ रही थी।गाड़ी के अंदर बैठा शख़्स अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था।काली शर्ट, काली पैंट, कलाई पर महँगी घड़ी, उँगली में चाँदी की अंगूठी, चौड़े कंधे और तीखे नैन-नक़्श।