कोई सुखी नहीं यहाँ

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कल रात बहुत तेज़ बारिश हुई थी। पूरी रात बादल गरजते रहे, बिजली चमकती रही। शहर के पक्के मकानों में रहने वालों के लिए ये मौसम सुहाना था। खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी, लोगों ने कंबल निकाले और चाय-पकौड़ों का लुत्फ़ लिया। पर गाँव से ज़रा हटकर, कच्चे रास्तों वाले खेतों में, ये बारिश सुहानी नहीं थी। वहाँ हर बूँद एक चिंता बनकर गिरी थी।सुबह होते ही मंगू खेत पर गया। मंगू कोई बड़ा किसान नहीं था, बस दो बीघा जमीन थी। इसी पर उसकी पूरी दुनिया टिकी थी।खेत की मेंड़ पर पहुँचते ही वह वहीं ठिठक गया। सामने