अल्फाज़ ए इश्क भाग 3

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तेज हवाओं का शोर जब थमा और सन्नाटा फिर से छा गया, तो कबीर भारी मन और उदास कदमों से उस सुनसान दीवार के पास से चला गया। वह अपने पीछे एक अधूरा शेर और एक अधूरी पेंटिंग छोड़ गया था[span_0](start_span)[span_0](end_span)[span_1](start_span)[span_1](end_span)। कुछ ही देर बाद, जब हवा पूरी तरह शांत हो चुकी थी, आयरा दबी पाँवों से वापस उसी जगह पर पहुँची। उसकी नज़र उस दीवार पर पड़ी जहाँ कबीर के छोड़े हुए निशान थे। वह समझ गई कि यह सब कबीर का ही लिखा हुआ है। आयरा ने आगे बढ़कर उस अधूरी पेंटिंग में थोड़े से और रंग भरे, लेकिन