सिरदर्द

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(कमरे में सुबह की नरम धूप खिड़की के पर्दों से छनकर आ रही है। हवा में एक अलग ही ताजगी और खुशबू है—शायद रात की बारिश और फूलों की मिली-जुली महक।)(सिमरन की पलकें झपकती हैं। उसे जैसे ही होश आता है, कल रात की यादें उसके चेहरे पर एक गहरी लालिमा ला देती हैं। वह शर्माते हुए करवट बदलती है और चादर को अपने चेहरे के पास खींच लेती है, लेकिन उसके होंठों पर एक अनजानी, संतुष्ट मुस्कान खेल रही है।)(तभी, करन की आँखें खुलती हैं। वह सिमरन को देखता है और उसके शर्माए हुए चेहरे को देखकर उसकी आँखों