विकसित बच्चा

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(सुबह की नरम धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। सिमरन की आँखें खुलीं, लेकिन वह तुरंत उठी नहीं। उसने पहले अपने पेट पर हाथ रखा, जैसे बच्चे का हालचाल पूछ रही हो। रात की घटना अभी भी उसके दिमाग में ताज़ा थी—वह राख, वह गुर्राहट, और वह अदृश्य सुरक्षा कवच।)(वह धीरे से बिस्तर से उठी। उसके शरीर में वही भारीपन और कमजोरी थी, लेकिन चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। वह अब डरी हुई नहीं, बल्कि सशक्त महसूस कर रही थी।)(वह बाथरूम गई, अपना चेहरा धोया और सादे लेकिन आरामदायक कपड़े पहने। जब वह कमरे से बाहर निकली,