कविता-अनुभूति से आनंद तक

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कविता-अनुभूति से आनंद तक(अनुज्ञा मिश्र )कविता केवल पढ़ने या सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की एक सुंदर साधना है। जब अनुभूति संवेदना बनती है, संवेदना चिंतन का रूप लेती है, चिंतन सृजन में परिवर्तित होता है और सृजन लोकमंगल का माध्यम बनता है, तभी मनुष्य सच्चे अर्थों में आनंद की अनुभूति करता है। भारतीय काव्य परंपरा केवल शब्दों का सौंदर्य नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति, जीवन का दर्शन, संवेदनाओं की साधना और समाज के कल्याण का सशक्त माध्यम है। कविता मनुष्य के अंतर्मन में छिपी भावनाओं, कल्पनाओं, विचारों और अनुभूतियों को सुंदर शब्दों में अभिव्यक्त करती है।