सिक्के चमड़े के

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जब किसी की किस्मत में लिखा हो कि चमड़े की मशक ढोते रहने से छिल रहे उसके दुखते कन्धों पर एक दिन मुल्क की बादशाहत आ बैठेगी, तो फिर बाकायदा ऐसा होकर ही रहता है. यह सब होता भी है कितनी मासूमियत के साथ. अचानक एक दिन एक बादशाह किसी दूसरे बादशाह से युद्ध में लड़ते लड़ते बुरी तरह घायल हो जाता है. उसके सेनापति, सरदार और आमात्य तितर बितर हो जाते हैं. अपने ही रक्त में सराबोर बादशाह अपने स्वामिभक्त और रणबाँकुरे घोड़े को एड़ लगाता है.