वास्तव में शारदा माँ सरस्वती का ही एक स्वरूप थी, निडर साहसी एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण अपने जीवन के हर क्षेत्र में सफल रही यहाँ तक कि अपने आखिरी समय में भी वे यही कह रही थी कि मुझे भगवान से मिलने जाना है