इश्क और इस्तीफा

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विराज मल्होत्रा = उम्र: 28 सालविराज शहर का सबसे कामयाब लेकिन सबसे "रूड" (Rude) बिजनेस टाइकून है। वह अनुशासन का पक्का है और उसे देरी बिल्कुल पसंद नहीं। वह अक्सर गहरे रंग के सूट पहनता है और उसकी आँखों में हमेशा एक गंभीरता रहती है। काव्या = उम्र: 23 साल।काव्या मध्यम वर्गीय परिवार की एक आत्मविश्वासी और खूबसूरत लड़की है। उसकी सादगी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वह साड़ियों और झुमकों की शौकीन है और उसकी मुस्कान किसी का भी दिन बना सकती है।

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इश्क और इस्तीफा - 1

Chapter 1विराज मल्होत्रा = उम्र: 28 सालविराज शहर का सबसे कामयाब लेकिन सबसे "रूड" (Rude) बिजनेस टाइकून है। वह का पक्का है और उसे देरी बिल्कुल पसंद नहीं। वह अक्सर गहरे रंग के सूट पहनता है और उसकी आँखों में हमेशा एक गंभीरता रहती है।काव्या = उम्र: 23 साल।काव्या मध्यम वर्गीय परिवार की एक आत्मविश्वासी और खूबसूरत लड़की है। उसकी सादगी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वह साड़ियों और झुमकों की शौकीन है और उसकी मुस्कान किसी का भी दिन बना सकती है।यह कहानी है विराज मल्होत्रा की, ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 2

अध्याय 2 पिंजरे में पहली रातकाव्या ने अपने हाथ में पकड़े बैग को से भींचा। उसके सामने विराज मल्होत्रा का आलीशान बंगला 'मल्होत्रा मेंशन' खड़ा था। यह घर जितना भव्य था, उतना ही ठंडा और खामोश भी।"अंदर आने के लिए क्या मुझे रेड कारपेट बिछाना पड़ेगा?" विराज की भारी आवाज़ उसके पीछे से आई। वह अभी-अभी अपनी काली कार से उतरा था।काव्या ने पलटकर उसे देखा। वह अब भी उसी सख्त अंदाज़ में था। "मैं यहाँ सिर्फ काम के लिए आई हूँ, सर। ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 3

Chapter 3 इश्क और इस्तीफा काव्या ने धीरे से अपने कमरे दरवाज़ा खोला। रात के दो बज रहे थे, लेकिन उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह आलीशान बंगला, जिसे विराज 'घर' कहता था, उसे किसी सुनसान महल जैसा लग रहा था।वह सीढ़ियों से उतरकर नीचे हॉल में आई। तभी उसकी नज़र गलियारे के आखिरी कोने में बने एक पुराने लकड़ी के दरवाज़े पर पड़ी। पूरे घर में आधुनिक कांच और स्टील का काम था, पर वह दरवाज़ा पुराना और भारी था। उस पर एक बड़ा सा पीतल का ताला ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 4

विराज मल्होत्रा के चले जाने के बाद भी काव्या वहीं हॉल में खामोश खड़ी रही। उसके दिल की धड़कनें भी सामान्य नहीं हुई थीं। वह पुराना दरवाज़ा और उस पर लटका भारी पीतल का ताला—जैसे कोई चीख-चीखकर कह रहा हो कि यहाँ कुछ ऐसा दफन है जिसे बाहर आने की इजाजत नहीं है। विराज की वे आँखें, जिनमें नफरत के पीछे छिपी बेबसी की झलक उसने देखी थी, काव्या के जेहन से हट नहीं रही थीं।अगली सुबह सूरज की रोशनी जब आलीशान बंगले की खिड़कियों से छनकर अंदर आई, तो माहौल रात के मुकाबले काफी शांत था। काव्या नाश्ते ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 5

Chapter 5रात के सन्नाटे में काव्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह फोटो रह-रहकर उसके सामने आ थी—विराज मल्होत्रा, जिसके चेहरे पर आज पत्थर जैसी खामोशी रहती है, उस तस्वीर में एक खिलखिलाते हुए युवा के रूप में था। उसके साथ वाली महिला और वो छोटी बच्ची कौन थी? क्या वही उस बंद कमरे का राज़ थे?अगली सुबह काव्या ने तय किया कि वह अब सीधे सवाल नहीं करेगी, बल्कि विराज के व्यवहार को गहराई से समझेगी। वह नाश्ते की मेज पर पहुँची, जहाँ विराज हमेशा ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 6

कमरे के भीतर का दृश्य देखकर काव्या सुन्न खड़ी थी। वह चीख जो उसके मुँह से निकली थी, अब की भारी ख़ामोशी में कहीं खो गई थी। कमरे की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे कार्टून और बिस्तर पर रखी वह अधूरी गुड़िया चीख-चीख कर किसी की मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो वक़्त यहाँ ठहर गया हो।विराज, जो अब तक पत्थर बना खड़ा था, अचानक टूट सा गया। वह धीरे से कमरे के बीच रखे छोटे से पालने के पास जाकर बैठ गया। उसके हाथ कांप रहे थे। "यह अनन्या का कमरा है," उसने दबी ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 7

कमरे के अंदर की हवा में बरसों से कैद सन्नाटा अब काव्या की सिसकियों और विराज की भारी सांसों टूट रहा था। विराज का वह कठोर चेहरा, जो ऑफिस में फाइलों और लैपटॉप के पीछे छिपा रहता था, आज कांच की तरह दरक चुका था। उसने अपनी कांपती उंगलियों से पालने के पास रखी एक छोटी सी गुड़िया को छुआ।"इसे अनन्या बहुत पसंद करती थी," विराज की आवाज़ में वह कड़वाहट अब नहीं थी, जिसे काव्या ने सुबह नाश्ते की मेज पर महसूस किया था। "मैं हर रात इस कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा होता था, पर अंदर ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 8

विराज के 'इस्तीफे' शब्द ने कमरे में जैसे समय को रोक दिया था। काव्या की आँखों में आँसू थे, वह वहां से हिली नहीं। 'मामा जी' के नाम से संबोधित वह व्यक्ति, जो नफरत और शराब के नशे में चूर था, जोर-जोर से हंसने लगा।"इस्तीफा? किससे इस्तीफा दे रहे हो विराज? अपनी यादों से? या उस गुनाह से जिसे तुम इस आलीशान कोठी की दीवारों में दफन करना चाहते हो?" मामा जी ने हाथ में पकड़े कांच के नुकीले टुकड़े को हवा में लहराते हुए कहा।विराज ने काव्या का हाथ मजबूती से पकड़ा और उसे धीरे से सीढ़ियों की ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 9

काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के छींटे डाल दिए "इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, सच का सामना करना समाधान है।" काव्या के ये शब्द विराज के कानों में बार-बार गूँज रहे थे। उसने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी आँखों में अब वह पुराना खालीपन नहीं था, बल्कि एक अजीब सी कशमकश और काव्या के प्रति एक गहरा सम्मान था, जो शब्दों के दायरे से परे था।"सच का सामना..." विराज की आवाज़ इस सन्नाटे में बेहद भारी सुनाई दी। उसने फर्श पर बिखरे नियति की तस्वीर के टुकड़ों ...Read More

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इश्क और इस्तीफा - 10

हाथ में थमी वह पुरानी, पीली पड़ चुकी चाबी काव्या को बेहद भारी महसूस हो रही थी। यह सिर्फ लोहे का टुकड़ा नहीं था, बल्कि विराज के उस अतीत का द्वार था जिसे उसने पिछले तीन सालों से दुनिया की नजरों से, और शायद खुद से भी छिपाकर रखा था।कोठी की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए काव्या के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। कोठी का सबसे ऊपरी हिस्सा बेहद शांत था, जहाँ धूल की एक महीन परत जमी हुई थी। जैसे-जैसे वह उस बंद कमरे के करीब पहुँच रही थी, हवा में एक अजीब सी उदासी और भारीपन साफ ...Read More