मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग

(5)
  • 36
  • 0
  • 2.9k

हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं जीते। वो चुप रहते हैं, मगर हर पल लड़ते रहते हैं। 'आर्यन' एक साधारण सा इंसान, जिसके कंधों पर सिर्फ ज़िम्मेदारियाँ नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें टिकी हैं। घर की तंग आर्थिक हालत, बीमार पिता की चिंता, और अपनी अधूरी ख्वाहिशों के बीच वो हर दिन खुद से ही एक नई लड़ाई लड़ता है। कभी वो अपने सपनों को कैमरे में कैद करता था, आज वही कैमरा उसकी मजबूरी का गवाह बन गया है। कभी वो मुस्कुराकर जीता था, आज उसकी मुस्कान भी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दब चुकी है। पर सवाल ये नहीं है कि वो कितना टूटा सवाल ये है कि वो हर बार टूटकर भी कैसे खड़ा हुआ?

1

मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 1

हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं वो चुप रहते हैं, मगर हर पल लड़ते रहते हैं। 'आर्यन' एक साधारण सा इंसान, जिसके कंधों पर सिर्फ ज़िम्मेदारियाँ नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें टिकी हैं। घर की तंग आर्थिक हालत, बीमार पिता की चिंता, और अपनी अधूरी ख्वाहिशों के बीच वो हर दिन खुद से ही एक नई लड़ाई लड़ता है। कभी वो अपने सपनों को कैमरे में कैद करता था, आज वही कैमरा उसकी मजबूरी का गवाह बन गया है। कभी वो मुस्कुराकर जीता था, आज उसकी मुस्कान भी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दब चुकी है। पर सवाल ये नहीं है कि वो कितना टूटा सवाल ये है कि वो हर बार टूटकर भी कैसे खड़ा हुआ? ये कहानी है उस इंसान की जो बोलता कम है लेकिन निभाता सब कुछ है। ये कहानी है उस बेटे की जो अप ...Read More

2

मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 2

पहली मुलाकात: बारिश और नीला छाताशहर में उस शाम अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान ने अचानक अपना रंग लिया। काले बादल जैसे पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले चुके थे।आर्यन ने दफ्तर से बाहर कदम रखा ही था कि तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। लोग इधर-उधर भागने लगे, गाड़ियों के हॉर्न का शोर बारिश की आवाज में डूब गया। आर्यन भी बस स्टॉप की ओर भागा, लेकिन तब तक वह आधा भीग चुका था। उसके हाथ में दफ्तर की कुछ बेहद जरूरी फाइलें थीं, जिन्हें वह अपने कोट के अंदर समेटकर बारिश से ...Read More

3

मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 3

Chapter 1 नायक: अनकही जंग की शुरूआतआर्यन की जिदंगी एक ऐसी किताब थी जिसके पन्ने समय बीतने के साथ और धूल भरे हो गए थे। उन पन्नों पर लिखी हर लाइन में संघर्ष था, जिम्मेदारी थी… और कहीं गहराई में दबे हुए अधूरे सपने भी थे।उसकी असलियत तो अलार्म की उस आवाज से शुरू होती थी, जो सुबह 6 बजे उसके कमरे की खामोशी को चीर देती। यह आवाज सिर्फ नींद नहीं तोड़ती थी, बल्कि उसे हर रोज उसकी जिम्मेदारियों की याद भी दिलाती थी।नींद, जो शायद पिछले सात सालों से उसने ठीक से ली ही नहीं थी। सुबह ...Read More

4

मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 4

महीने का आखिरी हफ्ता आर्यन के लिए सबसे भारी होता था। जैसे-जैसे तारीखें खत्म होने को आतीं उसकी चिंताएँ लगतीं। उस रात भी कुछ ऐसा ही था पूरा शहर गहरी नींद में डूबा हुआ था, सड़कों पर सन्नाटा पसरा था, लेकिन आर्यन की आँखों में नींद का नाम तक नहीं था। वह बालकनी में अकेला खड़ा था, अपने हाथ में बिजली का बिल लिए जो इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा आ गया था। वह बार-बार उस पर लिखी रकम को देखता, फिर अपनी जेब की हकीकत याद करता। हिसाब की गणित और जेब की हकीकत के बीच जद्दोजहद ...Read More