Moun Nayak - 2 in Hindi Motivational Stories by Abhi Anand books and stories PDF | मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 2

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मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 2

पहली मुलाकात: बारिश और नीला छाता
शहर में उस शाम अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान ने अचानक अपना रंग बदल लिया। काले बादल जैसे पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले चुके थे।
आर्यन ने दफ्तर से बाहर कदम रखा ही था कि तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। लोग इधर-उधर भागने लगे, गाड़ियों के हॉर्न का शोर बारिश की आवाज में डूब गया। आर्यन भी बस स्टॉप की ओर भागा, लेकिन तब तक वह आधा भीग चुका था। उसके हाथ में दफ्तर की कुछ बेहद जरूरी फाइलें थीं, जिन्हें वह अपने कोट के अंदर समेटकर बारिश से बचाने की नाकाम कोशिश कर रहा था। उसे डर था कि उसकी हफ्तों की मेहनत इन बारिश की बूंदों में धुल न जाए।
तभी, अचानक उसके सिर पर गिरती बारिश की बूंदें रुक गईं। आर्यन ने चौंककर ऊपर देखा—एक चटख नीला छाता उसके ऊपर तना हुआ था
"फाइलें खराब हो जाएंगी, इधर थोड़ा करीब आ जाइए," एक खनकती हुई आवाज उसके कानों में पड़ी
आर्यन ने मुड़कर देखा, तो पास ही एक लड़की खड़ी थी। साधारण कपड़े, चेहरे पर हल्की मुस्कान और आँखों में एक अजीब सी शांति। आर्यन उसकी बात मानकर थोड़ा और पास आ गया। उस छोटे से नीले दायरे में जैसे दुनिया सिमट गई थी—बाहर तूफान का शोर था, पर छाते के नीचे एक अनकही चुप्पी।
 आर्यन ने गौर किया कि उस लड़की ने छाता उसकी तरफ ज्यादा झुका रखा था ताकि उसकी फाइलें न भीगें, भले ही उसका अपना एक कंधा बारिश में पूरी तरह भीग चुका था। उसने आज तक सिर्फ दूसरों का बोझ उठाना सीखा था, पर आज पहली बार कोई अनजाना चेहरा उसके बोझ को 'छाता' बनकर ढँक रहा था।
आर्यन कुछ पल के लिए उसे देखता ही रह गया। फिर थोड़ा संभलते हुए बोला— "थ… थैंक यू…"
वह लड़की मुस्कुराते हुए बोली, "शुक्रिया बाद में करिएगा पहले अपनी फाइलें बचाइए।"
बस स्टॉप पर खड़े उन दस मिनटों में जो बातचीत हुई, वह बहुत साधारण थी—
उस लड़की ने आर्यन के दफ्तर की ओर इशारा करते हुए पूछा, "आप यहीं काम करते हैं?"
आर्यन ने जवाब दिया, "हाँ! और आप?"
"सामने वाली उस लाइब्रेरी में" उसने उंगली से इशारा करते हुए कहा।
वह पास ही की एक पुरानी लाइब्रेरी में काम करती थी, लेकिन आर्यन ने उसे पहले कभी नहीं देखा था। उसकी आँखों में एक ऐसी सादगी और सौम्यता थी, जो आर्यन की इस थकी हुई और भागदौड़ भरी दुनिया के लिए बिल्कुल अजनबी थी। उस मटमैली शाम में वह नीला छाता और उसकी मुस्कुराहट किसी ताजी हवा के झोंके जैसी लगी।
बस इतनी सी बातों ने आर्यन के भीतर बरसों से जमी बर्फ को जैसे पिघला दिया। उसे पहली बार महसूस हुआ कि अजनबियों के इस शहर में भी कोई इतनी सहजता से सहारा बन सकता है।
बस के आते ही भीड़ के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। आर्यन ने एक बार फिर मुड़कर देखा, वह अभी भी उसी नीले छाते के नीचे खड़ी थी। और फिर वह भीड़ में खो गया।

अगले दिन शाम को जब आर्यन घर पहुँचा, तो उसे ड्राइंग रूम से वही जानी-पहचानी खनकती हुई आवाज सुनाई दी। उसने अंदर कदम रखा, तो ठिठक गया—सामने वही नीला छाता सोफे के पास रखा था और वही अजनबी लड़की उसकी बहन समीक्षा के साथ बैठकर खिलखिला रही थी।
"अरे भाई! आप आ गए? मिलिए, ये अमल है, मेरी सबसे पक्की सहेली!" समीक्षा ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा।
आर्यन हैरान रह गया। जिसे वह कल तक एक अजनबी समझ रहा था, वह पहले से ही उसके घर का हिस्सा थी। अमल ने उसे देखते ही हल्की सी मुस्कान दी, जैसे वह पहले से ही उसे बहुत करीब से जानती हो।
समीक्षा धीरे से आर्यन के पास आई और कान में फुसफुसा कर बोली, "वैसे भाई, अमल को आपके बारे में सब पता है…"
आर्यन ने चौंककर पूछा, "क्या मतलब?"
समीक्षा मुस्कुराते हुए धीरे से बोली, "आपका संघर्ष, आपकी पसंद और उस 'कैनन कैमरे' के बारे में भी। और सच कहूँ तो इसे आपकी सादगी बहुत पसंद है।"
आर्यन को अचानक एहसास हुआ कि कल की बारिश और वह छाता महज एक इत्तेफाक नहीं था। समीक्षा अच्छी तरह जानती थी कि अमल उसके भाई को मन ही मन पसंद करती है, और शायद इसीलिए उसने बड़ी ही खूबसूरती से यह मुलाकात प्लान की थी। आर्यन की थकान एक बार फिर कम हो गई, लेकिन इस बार चेहरे पर एक हल्की सी शर्म और सुकून भरी मुस्कुराहट थी।
समीक्षा चाय बनाने के बहाने किचन में चली गई, और अचानक कमरे में एक भारी सा सन्नाटा छा गया। आर्यन को समझ नहीं आ रहा था कि बात कहाँ से शुरू करें। वह अपनी घड़ी की सुइयों को देख रहा था, तभी अमल की आवाज ने उस सन्नाटे को तोड़ा।
"कल की फाइलें सलामत हैं न?" अमल ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आर्यन थोड़ा झेंप गया, "हाँ... अगर कल आपका वह नीला छाता न होता, तो बॉस आज मुझे दफ्तर में ही दफन कर देते।"
अमल खिलखिलाकर हंस पड़ी। फिर थोड़ी गंभीर होकर बोली, "समीक्षा अक्सर आपके बारे में बात करती है। आपकी जिम्मेदारियां, आपकी मेहनत... और वह कैमरा भी। वैसे, सपने थोड़े देर से पूरे हों तो उनकी चमक और बढ़ जाती है, है न?"
आर्यन ने उसकी आँखों में देखा। वहाँ सहानुभूति नहीं, बल्कि एक गहरा सम्मान था।
"तुम्हें यह सब कैसे पता?" आर्यन ने धीरे से पूछा।
अमल ने अपनी नजरें झुका लीं और सोफे पर रखे अपने नीले छाते के हैंडल को सहलाते हुए बोली, "क्योंकि कुछ कहानियाँ पन्नों पर नहीं, खामोशियों में पढ़ी जाती हैं।"
आर्यन चुप हो गया। उसने महसूस किया कि कोई है, जो उसे बिना बोले समझता है, जो उसके अंदर की लड़ाई देख सकता है और शायद उसकी जिंदगी की कहानी में अब एक नया किरदार जुड़ चुका था।
तभी समीक्षा चाय लेकर अंदर आई, लेकिन उन दोनों के बीच की वह खामोश बातचीत अब एक अनकहे रिश्ते की शुरुआत कर चुकी थी।
समीक्षा ने आर्यन के चेहरे पर आई उस हल्की सी चमक को देख लिया था। वह मुस्कुराई, क्योंकि वह जानती थी कि आर्यन की इस 'अनकही जंग' में साथ देने के लिए एक और साथी आ चुका है।
अमल के जाने के बाद कमरे में उसकी बातों की मिठास तो बाकी थी, लेकिन कैलेंडर की बदलती तारीखें आर्यन को आने वाले मुश्किल हफ्ते की याद दिला रही थीं। उसे नहीं पता था कि सुकून के इन चंद लम्हों के ठीक बाद, उसकी सहनशक्ति की सबसे कठिन परीक्षा शुरू होने वाली है।