अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक बिल्डिंग की छत पर खड़ा है। उसकी आंखों की पुतलियाँ गहरी लाल चमकती हैं। करण (मन ही मन) में - मेरा मिशन साफ है, इंसानों को उनकी असली औक़ात दिखानी है। और किसी ऐसे इंसान को अपने जाल में फंसाना है जो दिल से साफ हो। ताकी मैं उसके भोलेपन का फायदा उठा सकूं।पर ये शहर , ये दिल्ली, यहां कुछ ऐसा है जो मुझे रोक रहा है।
Devil की दास्तान - 1
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है।धरती पर एक अजनबी उतरा है। चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है।करण धीरे-धीरे एक बिल्डिंग की छत पर खड़ा है। उसकी आंखों की पुतलियाँ गहरी लाल चमकती हैं।करण (मन ही मन) में -मेरा मिशन साफ है, इंसानों को उनकी असली औक़ात दिखानी है। और किसी ऐसे इंसान को अपने जाल में फंसाना है जो दिल से साफ हो। ताकी मैं उसके भोलेपन का फायदा उठा सकूं।पर ये शहर , ये दिल्ली, यहां कुछ ऐसा है जो मुझे रोक रहा है।वहीं ...Read More
Devil की दास्तान - 2
ऑफिस का कैबिन। AC की ठंडी हवा चल रही है, लेकिन सिमरन के माथे पर पसीना है। वो डरी-सहमी पर बैठी है। उसके सामने करण, गहरी नज़रों से लगातार उसे घूर रहा है।"कभी-कभी डर शब्दों से नहीं... निगाहों से पैदा होता है।सिमरन के लिए करण की लाल आँखें वही डर थीं... जो उसके सीने की धड़कनें रोक रही थीं।"सिमरन फाइल्स में नोट्स लिख रही है, लेकिन उसका ध्यान बार-बार करण की आंखों की तरफ चला जाता है। वो घबराकर नज़रें झुका लेती है।सिमरन (मन ही मन) में बोली -हे भगवान जी! ये बार-बार मुझे क्यों देखते हैं? ये इंसान ...Read More
Devil की दास्तान - 3
ऑफिस का ओपन एरिया। कुछ कर्मचारी कॉफी मशीन के पास खड़े होकर सिमरन का मज़ाक बना रहे हैं।कर्मचारी 1 हुए बोला -अरे ये तो बिलकुल बच्ची जैसी है। अठारह साल की है पर दिमाग़ से तेरह का।कर्मचारी 2 मज़ाक उड़ाते हुए बोला -कल तो ट्रैफिक सिग्नल पर भी खड़ी रह गई थी। हाहाहा।बाकी सब हंसने लगते हैं। सिमरन का चेहरा लाल पड़ जाता है। उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। वह चुपचाप अपना काम करने की कोशिश करती है, पर उसका दिल टूट रहा है।अचानक कमरे का माहौल बदल जाता है। करण अपने केबिन से बाहर आता है। ...Read More
Devil की दास्तान - 4
ऑफिस का देर रात का सीन। घड़ी में रात के 12 बज रहे हैं। पूरा फ्लोर खाली है। टेबल फाइलें बिखरी हैं। सिमरन थकी हुई कुर्सी पर बैठी-बैठी सो जाती है। उसके मासूम चेहरे पर नींद की झलक है।सिमरन मासूम और थकी हुई।उसे नहीं पता था कि उसकी नींद किसी और के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान थी।करण अंधेरे से बाहर आता है। उसकी आँखें लाल चमक रही हैं। वह धीरे-धीरे सिमरन की ओर बढ़ता है। उसके चेहरे पर पजेसिव गुस्सा और अंदर से निकलती भूख साफ दिखाई देती है।करण धीरे से खुद से फुसफुसाते हुए बोलायही मौका है।ये मेरे ...Read More