प्यार की परीभाषा

(2)
  • 42
  • 0
  • 933

ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी कर लिजिए 100% फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थी रसोई से बर्तनों की आवाज़ और मसालों की खुशबू पूरे घर में घुल चुकी थी। घर के बाकी लोग अभी अपने-अपने कमरों में थे, लेकिन रवीना काफी पहले उठ चुकी थी।रवीना ने चुपचाप चूल्हे पर रखा दूध उतारा और आटा गूंथते हुए अपने चेहरे से पसीने की बूंदें पोंछ लीं… उसके चेहरे पर थकान थी, पर आदत भी थी।

1

प्यार की परीभाषा - 1

ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी लिजिए 100 फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थी रसोई से बर्तनों की आवाज़ और मसालों की खुशबू पूरे घर में घुल चुकी थी। घर के बाकी लोग अभी अपने-अपने कमरों में थे, लेकिन रवीना काफी पहले उठ चुकी थी।रवीना ने चुपचाप चूल्हे पर रखा दूध उतारा और आटा गूंथते हुए अपने चेहरे से पसीने की बूंदें पोंछ लीं… उसके चेहरे पर थकान थी, पर आदत भी थी। जैसे ये सब ...Read More

2

प्यार की परीभाषा - 2

भाग - 3वो धीरे से उठी और रोज़ की तरह बिना किसी आवाज़ के रसोई में चली गई चूल्हा ही आग की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी उसके चेहरे पर वही शांति थी, लेकिन आँखों के नीचे हल्की थकान भी साफ़ दिख रही थीकुछ ही देर में माँ भी आ गईमाँ- “आज देर नहीं हो गई?”रवीना- “नहीं माँ समय से ही उठी हूँ”माँ ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा—माँ- “स्कूल में टीचर हो तो थोड़ा अपने आप पर भी ध्यान दिया करो ये ...Read More

3

प्यार की परीभाषा - 3

वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भीतर हलचल बढ़ती जा रही थीसुबह का समय था रवीना आज थोड़ा जल्दी उठ गई थी उसके सामने आज सिर्फ रसोई का काम नहीं था, बल्कि एक अलग तरह की जिम्मेदारी भी थी। उसने जल्दी-जल्दी नाश्ता बनाया सबको परोसा और खुद चुपचाप तैयार होने चली गईआज उसने हल्के नीले रंग का सूट पहना जो बहुत साधारण था, लेकिन उस पर साफ-सुथरा और सलीकेदार लग रहा था। उसने आईने में खुद को देखा कुछ पल के लिए ठहरी फिर हल्की सी मुस्कान के ...Read More