वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भीतर हलचल भी बढ़ती जा रही थी
सुबह का समय था रवीना आज थोड़ा जल्दी उठ गई थी उसके सामने आज सिर्फ रसोई का काम नहीं था, बल्कि एक अलग तरह की जिम्मेदारी भी थी। उसने जल्दी-जल्दी नाश्ता बनाया सबको परोसा और खुद चुपचाप तैयार होने चली गई
आज उसने हल्के नीले रंग का सूट पहना जो बहुत साधारण था, लेकिन उस पर साफ-सुथरा और सलीकेदार लग रहा था। उसने आईने में खुद को देखा कुछ पल के लिए ठहरी फिर हल्की सी मुस्कान के साथ नजरें झुका लीं।
तभी माँ की आवाज़ आई
माँ- आज बड़ी सज-धज रही हो कुछ खास है क्या?
रवीना- स्कूल से वर्कशॉप है उसी के लिए
माँ- शहूँ देख लेना, वहाँ जाकर कोई तमाशा मत करना
ये सुनकर रवीना के मन में हल्की सी घबराहट फिर से उठी लेकिन उसने कुछ नहीं कहा
पिता बाहर से बोले—
राकेश- अरे, मेरी बेटी बहुत अच्छा करेगी
काजल ने भी मुस्कुराकर कहा—
काजल- ऑल द बेस्ट दीदी
इन दो आवाज़ों ने उसके अंदर थोड़ी हिम्मत भर दी
स्कूल के बाहर माही उसका इंतज़ार कर रही थी—
माही- आ गई मेरी स्टार टीचर ?
रवीना हल्का सा मुस्कुरा दी
रवीना- डर लग रहा है
माही ने उसके कंधे पर हाथ रखा—
माही- डर लगना गलत नहीं है हार मानना गलत है
दोनों साथ में वर्कशॉप के लिए निकल गईं
उधर, तुषार भी सुबह से ही बेचैन था उसने कई बार अपने नोट्स चेक किए सिस्टम सेटअप देखा सब कुछ ठीक था, फिर भी उसके हाथों में हल्की कंपकंपी थी
सीनियर ने पास आकर कहा—
सीनियर- रिलैक्स तुषार सब ठीक होगा
तुषार ने बस सिर हिला दिया वर्कशॉप का हॉल धीरे-धीरे लोगों से भरने लगा अलग-अलग स्कूलों के टीचर्स और स्टूडेंट्स आ चुके थे
रवीना और माही भी अंदर आईं रवीना की नजरें इधर-उधर घूम रही थीं जैसे वो खुद को इस माहौल में फिट करने की कोशिश कर रही हो
तभी स्टेज के पास खड़ा एक लड़का—तुषार—सिस्टम चेक कर रहा था उसकी नजर अचानक सामने खड़ी रवीना पर पड़ी एक पल के लिए वो रुक गया
रवीना भी उसी तरफ देख रही थी दोनों की आँखें कुछ सेकंड के लिए मिलीं फिर दोनों ने ही नजरें हटा लीं
कोई शब्द नहीं था, कोई पहचान नहीं थी , लेकिन फिर भी कुछ अजीब सा ठहराव था उस पल में वर्कशॉप शुरू हुई
तुषार स्टेज पर आया माइक्रोफोन हाथ में लेते ही उसकी आवाज़ थोड़ी धीमी हो गई
तुषार- ग… गुड मॉर्निंग
उसने खुद को संभाला
तुषार- आज हम… बेसिक कंप्यूटर और कुछ एडवांस टॉपिक्स कवर करेंगे
उसकी आवाज़ में आत्मविश्वास कम था लेकिन कोशिश साफ़ दिख रही थी
माही ने धीरे से उसके कान में कहा—
माही- देख कोई है जो तुझसे भी ज्यादा डरा हुआ है
रवीना हल्का सा मुस्कुरा दी वर्कशॉप के एक सेशन में, पार्टिसिपेंट्स को खुद से एक छोटा प्रेजेंटेशन देना था
रवीना का नाम पुकारा गया— उसका दिल तेज़ धड़कने लगा हाथ ठंडे हो गए
वो धीरे-धीरे स्टेज की तरफ बढ़ी पीछे खड़ा तुषार उसे देख रहा था रवीना ने माइक्रोफोन पकड़ा कुछ पल के लिए चुप रही फिर धीरे से बोलना शुरू किया
रवीना- मेरा नाम रवीना है और मैं एक स्कूल में कंप्यूटर पढ़ाती हूँ
उसकी आवाज़ में हल्की कंपकंपी थी लेकिन शब्द साफ़ थे
जैसे-जैसे वो बोलती गई उसका आत्मविश्वास थोड़ा-थोड़ा बढ़ता गया
रवीना ने अपना प्रेजेंटेशन खत्म किया और धीरे से “थैंक यू” बोलकर नीचे उतर आई। उसकी सांस थोड़ी तेज़ चल रही थी, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
माही ने पास आते ही धीरे से कहा— देखा हो गया
रवीना ने हल्का सा सिर हिलाया— बस जैसे-तैसे
दोनों अपनी सीट पर बैठ गईं स्टेज पर तुषार अगला सेशन शुरू करने की तैयारी कर रहा था। उसने सिस्टम में कुछ फाइल्स खोलीं, फिर एक बार स्क्रीन की तरफ देखा जैसे खुद को कन्फर्म कर रहा हो कि सब सही है
एक जगह पर वो थोड़ा अटक गया उसने फाइल दोबारा खोलने की कोशिश की, लेकिन सही से नहीं खुल रही थी।
पीछे से किसी ने धीरे से कहा— सर, शायद फोल्डर में path change हो गया है
तुषार ने मुड़कर देखा ये रवीना थी वो अपनी सीट से थोड़ा आगे झुककर स्क्रीन की तरफ इशारा कर रही थी।
तुषार ने तुरंत नजर हटा ली— हाँ एक मिनट
उसने फिर से चेक किया और इस बार फाइल खुल गई
“ठीक है ” उसने धीमे से कहा
रवीना वापस सीधी होकर बैठ गई जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
माही ने हल्के से मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा— मैडम जी, मदद भी कर देती हो चुपचाप
रवीना ने बस नजरें नीचे कर लीं— बस दिख गया तो बोल दिया
वर्कशॉप खत्म होने के बाद लोग धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे वैसे बहुत सारे लोग थे जो बोलने में फंसे थे, रवीना और माही भी बाहर आ गईं
माही— चल, आज तो तूने अच्छा कर लिया अब treat बनती है
रवीना— नहीं यार घर जाना है
माही— तू हर बार यही बोलती है
दोनों हल्की-फुल्की बात करते हुए आगे बढ़ गईं
उधर तुषार हॉल के अंदर ही रुक गया था। वो सिस्टम बंद कर रहा था उसने एक बार दरवाज़े की तरफ देखा… जहाँ से अभी-अभी लोग बाहर गए थे फिर उसने वापस स्क्रीन की तरफ ध्यान दे दिया काम खत्म करके वो धीरे-धीरे बाहर निकला
अगले दिन स्कूल में सब कुछ पहले जैसा ही था वही क्लास, वही बच्चे, वही स्टाफ रूम की हलचल रवीना अपनी सीट पर बैठी कॉपी चेक कर रही थी माही सामने बैठी थी और कुछ लिख रही थी
माही— कल के बाद कैसा लग रहा है?
रवीना— कुछ खास नहीं बस ठीक था
माही ने पेन रोककर उसकी तरफ देखा— तू हमेशा ‘ठीक’ ही बोलती है
रवीना ने हल्का सा कंधा उचकाया— और क्या बोलूँ
माही— वो लड़का जो वर्कशॉप ले रहा था उसका नाम क्या था?
रवीना ने बिना ऊपर देखे जवाब दिया— पता नहीं
माही— अच्छा पर तूने उसकी मदद तो कर दी
रवीना— बस सामने था, इसलिए बोल दिया
माही हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन कुछ बोली नहीं
उधर, तुषार अपने ऑफिस में बैठा था आज काम थोड़ा कम था, फिर भी वो स्क्रीन के सामने बैठा कुछ न कुछ करता जा रहा था
उसके सीनियर ने आते हुए कहा— कल ठीक संभाल लिया तुमने
तुषार— कुछ खास नहीं था
सीनियर— पहले से बेहतर था
तुषार ने बस “हूँ” कहा
सीनियर थोड़ी देर रुके, फिर बोले— लोगों से थोड़ा बात करना शुरू करो क्योंकि एक बार सादी हो गई तो वैसे भी पत्नी ज्यादा बोलने नहीं देगी
तुषार ने कोई जवाब नहीं दिया बस मुस्कुरा दिया शाम को घर पर तुषार ने फिर से पैसे माँ को दिए माँ ने पहले की तरह बिना कुछ कहे रख लिए जो की हमेशा का था
पाता पास बैठे थे
पाता— आज काम कैसा था
तुषार— ठीक
पाता— ठीक से थोड़ा ज्यादा भी हो सकता है
तुषार हल्का सा मुस्कुराया… लेकिन कुछ बोला नहीं।
भाई मोबाइल पर था—
भाई— तुषार , recharge करवा देना नेट खत्म हो गया है।
तुषार— कर दूँगा…
बहन— और मेरे notes print भी
तुषार— ठीक है
बात वहीं खत्म हो गई कोई बहस नहीं, कोई ज्यादा ताना नहीं बस जरूरत भर की बातें
उधर, रवीना घर पहुँची रसोई में जाकर उसने चुपचाप खाना बनाना शुरू कर दिया माँ वहीं खड़ी थी
माँ— आज स्कूल में क्या खास था ?
रवीना— कुछ नहीं
माँ— अच्छा है कम से कम कहीं बेइज्जती तो नहीं हुई
रवीना ने हाथ रोक दिए लेकिन इस बार उसने खुद को तुरंत संभाल लिया।
रात को, अपने कमरे में बैठी रवीना ने बैग से एक कागज़ निकाला—वर्कशॉप का
उसने उसे कुछ सेकंड देखा फिर वापस रख दिया कोई खास याद नहीं थी बस एक दिन था जो गुजर गया
उसी समय, तुषार भी अपने कमरे में था। उसने लैपटॉप खोला, फिर बंद कर दिया कुछ सोचकर उसने फोन उठाया फिर वापस रख दिया। जैसे उसे खुद ही समझ नहीं आ रहा था क्या करना है