गीत गाने दो मुझे

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पण्डित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ यह नाम उनका अपना दिया हुआ था। स्कूल का नाम सुर्ज कुमार घर पर भी चलता था या नहीं इसे कौन बताए? घर गढ़ाकोला उन्नाव में, पिता पंडित राम सहाय तिवारी। तिवारी एक दिन खुरपा लेकर घास छीलने निकले। खुरपे को खेत में गाड़कर बंगाल की राह पकड़ ली । महिषादल में सिपाही बने। आखिर गाँव में चार पैसा कैसे मिलता? कुछ कमाया, घर बनाया। बच्चे को पाला-पोसा , बड़ा किया। विवाह 1911 में मनोहरा से कर दिया जिसे संगीत-साहित्य में विशेष रुचि थी। साक्षात् अपोलो की तरह दिखने वाला बच्चा हाई स्कूल पास नहीं कर सका। पर अपोलो को भी पेट की भूख सताती है।

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गीत गाने दो मुझे - 1

पण्डित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ यह नाम उनका अपना दिया हुआ था। स्कूल का नाम सुर्ज कुमार घर पर भी था या नहीं इसे कौन बताए? घर गढ़ाकोला उन्नाव में, पिता पंडित राम सहाय तिवारी। तिवारी एक दिन खुरपा लेकर घास छीलने निकले। खुरपे को खेत में गाड़कर बंगाल की राह पकड़ ली । महिषादल में सिपाही बने। आखिर गाँव में चार पैसा कैसे मिलता? कुछ कमाया, घर बनाया। बच्चे को पाला-पोसा , बड़ा किया। विवाह 1911 में मनोहरा से कर दिया जिसे संगीत-साहित्य में विशेष रुचि थी। साक्षात् अपोलो की तरह दिखने वाला बच्चा हाई स्कूल पास नहीं कर ...Read More

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गीत गाने दो मुझे - 2

अंक- 2(दृश्य वही। दीवाल पर बने चित्र धूमिल पड़ गये हैं। दरवाजे के दाँई ओर सारस के एक जोड़े चित्र बना है। तख्ता थोड़ा बाईं ओर हटा हुआ है। उस पर कोई बिस्तर नहीं है। नट-नटी का बातें करते हुए प्रवेश।)नटी- वाने ना करीबेटा बेटी एकउन्हीं को मत्था टेकवाने ना करी।नट- वाने ना करीनटी- हाँ, हाँ वाने ना करी।नट- वह तो सिर्फ बाइस का था!नटी- वह केवल उन्नीस की थी!नट- वह गया था बंगाल।नटी- वह रहती मैके या ससुराल।नट- इतनी नाजुक उम्र में प्रिया परलोक गई!नटी- मंत्र ऐसा कौन दे गई?नट- जिससे निराला रात-रात ष्मशान का चक्कर लगातानटी- दूसरे ...Read More

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गीत गाने दो मुझे - 3

अंक तीन (निराला का वही घर । ओसारा जर्जर हो चुका है। तख्ते पर रजाई बिछी है। तकिए की ईट रखी है। दीवाल के निकट ही पानी से भरा घड़ा रखा है। घड़ा एक कुल्हड़ से ढका है। दीवाल के सहारे पक्षियों की मिट्ठी की मूर्तियाँ टँगी हैं तथा खूंटी पर कुर्ता। धीरे - धीरे मंच पर प्रकाश बढ़ता है। दाएँ से नट एवं बाएँ से नटी प्रवेश करती है।)नट- जिस पौरुश ने लीक दिखाई लोक दिखाया,नटी- वह माटी की मूरत कैसे बन सकता था।नट- जो उतरा था बनकर मशाल इस धरती पर,नटी- कैसे वह फागुन को सावन कह ...Read More