दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी

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दुनिया में कुछ घाव ऐसे होते हैं जो दिखाई नहीं देते। उनसे खून नहीं बहता, उनके लिए कोई पट्टी नहीं बंधती और न ही डॉक्टर की रिपोर्ट में उनका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। फिर भी वे इंसान को भीतर से इस कदर तोड़ देते हैं कि वह जीते-जी एक खामोश खंडहर बन जाता है। ऐसे घाव मन पर लगते हैं, और मन के घावों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि समाज अक्सर उन्हें घाव मानने से भी इंकार कर देता है। लोग टूटे हुए हाथ-पैर को देखकर सहानुभूति जता देते हैं, लेकिन टूटी हुई आत्मा को अक्सर आलस्य, कमजोरी या नालायकी का नाम दे दिया जाता है।

Full Novel

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दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 1

अनुशासन के नाम पर बचपन का कत्लदुनिया में कुछ घाव ऐसे होते हैं जो दिखाई नहीं देते। उनसे खून बहता, उनके लिए कोई पट्टी नहीं बंधती और न ही डॉक्टर की रिपोर्ट में उनका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। फिर भी वे इंसान को भीतर से इस कदर तोड़ देते हैं कि वह जीते-जी एक खामोश खंडहर बन जाता है। ऐसे घाव मन पर लगते हैं, और मन के घावों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि समाज अक्सर उन्हें घाव मानने से भी इंकार कर देता है। लोग टूटे हुए हाथ-पैर को देखकर सहानुभूति जता देते हैं, लेकिन टूटी ...Read More

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दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 2

जब आत्मसम्मान को व्यवस्थित तरीके से तोड़ा जाता हैहर बच्चा इस दुनिया में संभावनाओं के साथ जन्म लेता है, के साथ नहीं। उसे यह विश्वास सिखाया जाता है कि वह कुछ कर सकता है, और यह डर भी कि वह कभी कुछ नहीं कर पाएगा। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उसे बचपन में किस तरह का माहौल मिला। जिस प्रकार एक पौधा रोज़ पानी मिलने पर हरा-भरा होता है, उसी प्रकार बच्चे का आत्मसम्मान भी प्रेम, प्रोत्साहन और सम्मान से विकसित होता है। लेकिन यदि उसी पौधे को रोज़ जड़ से काटा जाए, उसकी शाखाएँ ...Read More

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दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 3

खामोश डिप्रेशन: जब इंसान जीता तो है, लेकिन जीवन महसूस नहीं कर पाताअवसाद हमेशा आँसुओं के रूप में दिखाई देता। हर अवसादग्रस्त व्यक्ति दिन-रात रोता नहीं है, न ही हर समय उदास दिखाई देता है। कई बार अवसाद इतना खामोश होता है कि वर्षों तक व्यक्ति स्वयं भी नहीं समझ पाता कि वह एक गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। बाहर से वह सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर उसका मन धीरे-धीरे जीवन से अपना संबंध खोता जा रहा होता है।उस लड़के के साथ भी यही हुआ।शुरुआत में उसे लगा कि वह केवल तनाव में है। फिर उसने ...Read More

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दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 5

घर वापसी: जब इंसान बदल जाए, लेकिन माहौल न बदलेउपचार के बाद वह लड़का पहले जैसा नहीं रहा था। तक जिस अंधेरे ने उसके जीवन को घेर रखा था, उसमें अब कुछ रोशनी दिखाई देने लगी थी। वह अपनी मानसिक स्थिति को समझने लगा था। उसे यह पता चल चुका था कि उसके विचार, उसकी बेचैनी, उसका अवसाद और उसकी मजबूरियाँ किसी चरित्र दोष का परिणाम नहीं थीं। वे उन परिस्थितियों की प्रतिक्रिया थीं जिनमें वह वर्षों तक जीता रहा था।उसे लगा था कि अब शायद जीवन एक नई शुरुआत करेगा।लेकिन वास्तविक जीवन की सबसे कठिन सच्चाइयों में से ...Read More

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दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 4

जब अपना ही दिमाग दुश्मन बन जाए: OCD का चक्रव्यूहमानव जीवन में सबसे सुरक्षित स्थान उसका अपना मन माना है। जब दुनिया विरोध में खड़ी हो, तब भी इंसान अपने विचारों में शरण ढूँढ़ लेता है। लेकिन कुछ मानसिक बीमारियाँ ऐसी होती हैं जो इसी सुरक्षित जगह को युद्धभूमि बना देती हैं। व्यक्ति बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि अपने ही दिमाग से लड़ने लगता है। उसके विचार उसके नियंत्रण में नहीं रहते और उसका मन हर दिन उसे उसी पीड़ा में धकेलता रहता है जिससे वह बचना चाहता है।उस लड़के के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।वर्षों के ...Read More