अधूरी किताब - सीजन 2

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अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डूब जाती थीं। ऐसी ही एक ठंडी रात थी। घड़ी में लगभग बारह बज रहे थे। चौक इलाके की एक संकरी गली में "ज्ञानदीप पुस्तकालय" नाम की एक पुरानी किताबों की दुकान थी। दुकान इतनी पुरानी थी कि लोग कहते थे उसके अंदर रखी कुछ किताबें सौ साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। दुकान का मालिक रघुनाथ मिश्रा सत्तर वर्ष का बूढ़ा आदमी था। उसने जिंदगी का अधिकांश समय किताबों के बीच बिताया था।

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 1

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताबवाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डूब जाती थीं।ऐसी ही एक ठंडी रात थी।घड़ी में लगभग बारह बज रहे थे।चौक इलाके की एक संकरी गली में "ज्ञानदीप पुस्तकालय" नाम की एक पुरानी किताबों की दुकान थी। दुकान इतनी पुरानी थी कि लोग कहते थे उसके अंदर रखी कुछ किताबें सौ साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।दुकान का मालिक रघुनाथ मिश्रा सत्तर वर्ष का बूढ़ा आदमी था।उसने जिंदगी का अधिकांश समय किताबों के बीच ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 2

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 2 : मणिकर्णिका घाट का रहस्यपूरी रात अनन्या की आँखों में नींद नहीं थी।उसके मेज़ पर रखी "अधूरी किताब" बंद पड़ी थी, लेकिन उसका मन बार-बार उसी की ओर जा रहा था।आखिरी पन्ने पर लिखा संदेश अब भी उसके दिमाग में गूंज रहा था—"कल रात बारह बजे मणिकर्णिका घाट पर आना... अगर सच जानना है।"सुबह होते ही उसने खुद को समझाने की कोशिश की कि यह सब उसका भ्रम है।लेकिन जब उसने किताब खोली, तो उसका दिल एक बार फिर दहल गया।जहाँ कल रात संदेश लिखा था, वहाँ अब कुछ भी नहीं था।पन्ना बिल्कुल ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 3

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 3 : बचपन का रहस्यरात के तीन बज चुके थे।अनन्या के हाथ अब भी रहे थे।उसकी आँखें सामने रखी उस तस्वीर पर जमी थीं जिसमें एक छोटा बच्चा दिखाई दे रहा था।लेकिन वह कोई साधारण तस्वीर नहीं थी।वह उसकी अपनी तस्वीर थी।उसका बचपन।उसकी यादें।उसका अतीत।"यह... यह यहाँ कैसे हो सकती है?"अनन्या की आवाज काँप रही थी।उसने तस्वीर को बार-बार देखा।कोई शक नहीं था।वह वही थी।उसी उम्र की।उसी कपड़ों में।लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि तस्वीर के पीछे एक तारीख लिखी थी।12 जून 2005अनन्या का दिल तेजी से धड़कने लगा।उस तारीख से जुड़ी एक ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 4

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 4 : आर्या का श्रापबंगले के अंदर मौत जैसा सन्नाटा छाया हुआ था।अनन्या और मामा एक-दूसरे को भयभीत नजरों से देख रहे थे।अधूरी किताब अब भी खुली हुई थी।उसके पन्नों पर वही शब्द चमक रहे थे—"वह जाग चुकी है...""आर्या वापस आ गई है..."अचानक पूरे कमरे की लाइटें झिलमिलाने लगीं।हालाँकि बंगले में वर्षों से बिजली नहीं थी।फिर भी दीवारों पर नीली रोशनी फैलने लगी।मानो किसी अदृश्य शक्ति ने पूरे घर को घेर लिया हो।अनन्या की धड़कनें तेज हो गईं।"मामा... आखिर यह आर्या कौन है?"मामा के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।उनके होंठ काँप ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 5

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 5 : सफेद आँखों वाला आदमीबंगले की टूटी हुई खिड़की के बाहर खड़ा वह धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा था।उसकी सफेद आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।अनन्या का पूरा शरीर काँप उठा।क्योंकि वह चेहरा...उसके पिता जैसा था।बिल्कुल वैसा।उसी तरह की नाक।उसी तरह का चेहरा।उसी तरह के बाल।"नहीं..."अनन्या के मुँह से निकला।"यह नहीं हो सकता।"उसके पिता की मौत बीस साल पहले हो चुकी थी।फिर यह आदमी कौन था?और वह उसके पिता जैसा क्यों दिख रहा था?अचानक वह आदमी खिड़की के पास से गायब हो गया।मानो कभी वहाँ था ही नहीं।लेकिन अगले ही पल...नीचे से कदमों की आवाज ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 6

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 6 : असली अनन्याअनन्या की साँसें तेज़ चल रही थीं।उसके सामने खड़ी लड़की बिल्कुल जैसी दिख रही थी।वही चेहरा।वही आँखें।वही कद।यहाँ तक कि उसके चेहरे पर मौजूद छोटा-सा तिल भी बिल्कुल उसी जगह था।कुछ सेकंड तक अनन्या सिर्फ उसे देखती रही।उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह सपना देख रही है या सचमुच यह सब हो रहा है।फिर उसने हिम्मत जुटाकर पूछा—"तुम कौन हो?"लड़की मुस्कुराई।"मैंने अभी बताया तो था।""मैं असली अनन्या हूँ।"यह सुनकर अनन्या का सिर चकरा गया।"नहीं... यह असंभव है।""असंभव?"लड़की हँस पड़ी।उसकी हँसी पूरे विशाल पुस्तकालय में गूँजने लगी।"इस जगह पर असंभव ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 7

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 7 : भूली हुई पहचानपूरा पुस्तकालय टूट रहा था।विशाल अलमारियाँ एक-एक करके गिर रही किताबों के पन्ने हवा में उड़ रहे थे।कहीं आग की लपटें उठ रही थीं तो कहीं काला धुआँ फैल रहा था।लेकिन इस विनाश के बीच भी अनन्या के कानों में सिर्फ एक बात गूँज रही थी—"आज से तुम्हारा नाम आर्या नहीं रहेगा...""आज से तुम अनन्या कहलाओगी..."उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था।"नहीं...""यह सच नहीं हो सकता।"उसने खुद से कहा।लेकिन भीतर कहीं न कहीं उसे महसूस हो रहा था कि वह दृश्य सिर्फ भ्रम नहीं था।वह कोई पुरानी याद थी।एक ऐसा ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 8

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 8 : अधूरी किताब का जन्मविशाल पुस्तकालय अब भी काँप रहा था।हजारों किताबों के हवा में उड़ रहे थे।काली परछाइयाँ चारों ओर फैलती जा रही थीं।लेकिन इस सबके बीच एक अजीब शांति थी।क्योंकि वहाँ खड़ा वह बूढ़ा साधु किसी साधारण इंसान जैसा नहीं लग रहा था।उसकी आँखों में ऐसी चमक थी मानो वह सदियों से सब कुछ देखता आ रहा हो।अनन्या उसकी तरफ देख रही थी।उसके मन में हजारों सवाल थे।और शायद...उन सभी सवालों के जवाब अब मिलने वाले थे।सफेद आँखों वाला आदमी गुस्से से चीखा—"तुम्हें मर जाना चाहिए था!"साधु शांत खड़ा रहा।उसके चेहरे ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 9

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 9 : आखिरी पन्ने का रहस्यपूरा पुस्तकालय अंधेरे में डूब चुका था।कुछ क्षण पहले जहाँ हजारों किताबें दिखाई दे रही थीं, वहाँ अब सिर्फ काला सन्नाटा था।अनन्या को ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी गहरे कुएँ में गिर रही हो।उसके कानों में अजीब-अजीब आवाजें गूँज रही थीं।कभी किसी बच्चे की हँसी।कभी किसी औरत के रोने की आवाज।कभी किसी आदमी की दर्दभरी चीख।और फिर...एक परिचित आवाज सुनाई दी।"अनु..."अनन्या का दिल धड़क उठा।यह आवाज उसने पहले भी सुनी थी।बहुत साल पहले।अपने सपनों में।अपनी धुँधली यादों में।"अनु..."आवाज फिर आई।इस बार और करीब।अनन्या ने आँखें खोलने की ...Read More

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 10

अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 10 : तीन आत्माओं का फैसलाअनंत पुस्तकालय में मौत जैसा सन्नाटा छाया हुआ था।अधूरी हवा में तैर रही थी।उसका आखिरी पन्ना खुला हुआ था।और उस पर लिखे शब्द हर किसी के दिल में डर पैदा कर रहे थे—"तीनों आत्माओं का एक होना आवश्यक है...""लेकिन उनमें से केवल एक ही जीवित बचेगी।"अनन्या की आँखें उस पन्ने पर जमी थीं।उसके हाथ काँप रहे थे।उसे लग रहा था मानो उसकी पूरी दुनिया एक पल में बदल गई हो।आर्या कुछ दूरी पर खड़ी थी।उसके चेहरे पर पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।वह हमेशा से इस किताब ...Read More