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नर्क - 12
by Priyansu Jain

"आयु मेरी तुमसे ये अपेक्षा न थी। तुमने उस ग्रह को सिर्फ इसलिए नष्ट किया क्यूँकि तुम प्राचीन जीवन मिटाकर नवीन रचना करना चाह रहे थे?? तुमने ये भी ...

સ્ટ્રીટ નં - 69 - પ્રકરણ -24
by Dakshesh Inamdar

સાવી, સોહમને બધી એનાં પાછળનાં ભૂતકાળની વાતો કરી રહી હતી. વરસાદ ધીમો પડેલો...સાવીએ આકાશ તરફ જોઈને કહ્યું “સોહુ વરસી વરસીને મેઘ પણ થાક્યો...પણ મારી વાચા નથી થાકી એવું થાય ...

दानव द रिस्की लव - 20
by Pooja Singh

….……Now on ……….विवेक : हां मां phone कर लो ……मालती : हां …. (In phone )……हेलो ! अदिति …उधर फोन बबिता उठाती है ……बबिता : जी ….माफ किजिए पर ...

नर्क - 11
by Priyansu Jain

"सर, मैं ऐसी ड्रेस नहीं पहन सकती मेरे घर वाले अलाऊ नहीं करते." "मिस निशा, ये बहाना नहीं चलेगा। जहाँ तक मुझे मालूम है, आप और आपके भाई के ...

दानव द रिस्की लव - 19
by Pooja Singh

……Now on ………आदित्य : संभलकर बैठो अदि……!अदिति : हां …. भैय्या..... (Sit पर सिर टिकाकर बैठ जाती हैं )………in aditi ' s house ……आदित्य : अदि चल बाहर ….अदि ...

नर्क - 10
by Priyansu Jain

ओह्ह्ह्ह माय गोड, वो दरिंदा मेरे से कोई पुरानी जान पहचान निकाल रहा था। वो मुझे पहले से जानता था। पर मुझे तो याद ही नहीं आ रहा। हो ...

સ્મશાન વૈરાગ્ય
by DIPAK CHITNIS

// સ્મશાન વૈરાગ્ય// નમસ્કાર મિત્રો, આ બહુ જૂની વાર્તા નથી. એક દિવસ એક કંપનીમાં નોકરી કરતો એક છોકરો હતો. તેને કોઈ ભૂત-પ્રેતમાં વિશ્વાસ નહોતો. તે ભૂતની બાબતમાં માત્ર મનની ...

श्रापित रंगमहल--(अंतिम भाग)
by Saroj Verma

रात हुई और श्रेयांश रात का खाना खाकर फिर से अपने कमरें में पहुँचा, जब वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा तो उसे जोर जोर से फिर से ...

श्रापित रंगमहल--भाग(४)
by Saroj Verma

धूमकेतु के ऐसे आचरण से शाकंभरी विक्षिप्त हो चुकी थी,उसे स्वयं से घृणा हो रही थी,उसे अब अपने भ्राता पुष्पराज की प्रतीक्षा थी कि वो शीघ्र ही राजमहल आकर ...

नर्क - 9
by Priyansu Jain

3 हजार वर्ष पहले एक अज्ञात स्थान पर "तुम ये क्या प्रालाप (बकवास) कर रहे हो?? जानते हो, इसका परिणाम मृत्यु हो सकता है??" एक सुसज्जित योद्धा अपने समक्ष ...

સ્ટ્રીટ નં - 69 - પ્રકરણ -23
by Dakshesh Inamdar

સ્ટ્રીટ નંબર- 69 પ્રકરણ -23         સાવી પ્રેમની વાતોમાંથી અચાનક સોહમનાં શબ્દોનો અર્થ કાઢતી પોતાની આપવીતી કહેવા લાગી હતી એને એનાં દીલનો ઉભરો ખાલી કરવો હતો. સોહમ એને ...

दानव द रिस्की लव - 18
by Pooja Singh

………Now on…….अदिति : भैय्या..... चलो please ….!आदित्य : अदि ….सुबह होने दे ….इशान कह रहा था अदिति : भैय्या..... मुझे कुछ नही सुनना ….आप चल रहे हो या नहीं ...

श्रापित रंगमहल--भाग(३)
by Saroj Verma

शाकंभरी रात्रि के भोजन की ब्यवस्था करने लगी,उसने कुटिया के कोने पर बने मिट्टी के चूल्हे में भोजन बनाना प्रारम्भ कर दिया,भोजन पक जाने के उपरान्त उसने सभी के ...

श्रापित रंगमहल-भाग(२)
by Saroj Verma

श्रेयांश ने राजमहल के बारें में सुनी बातों पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए अपनी चित्रकारी पर ध्यान देना ज्यादा उचित समझा इसलिए वो पुराने महल को बहुत ध्यान ...

दानव द रिस्की लव - 17
by Pooja Singh

……Now on……विवेक : अदिति तुम जाओ …. अपना ध्यान रखना my sweet heart …(forehead kiss)….!अदिति : तुम अपना ध्यान रखना ….मैं तो अब घर में ही हूं....विवेक : (मन ...

સ્ટ્રીટ નં - 69 - પ્રકરણ -22
by Dakshesh Inamdar

સ્ટ્રીટ નંબર- 69 પ્રકરણ -22          સોહમ અને સાવી રાત્રીનાં સમયમાં એક દુકાનનાં આંગણમાં બનેલાં ઓટલાં જેવાં ભાગે અવરજવરને અવગણીને એકમેકનાં પ્રેમમાં રસતરબોળ હતાં. તેઓ બધું ભૂલીને બસ ...

ડરનો સાયો ગહેરો, આત્માનો પહેરો - 3 - (કલાઈમેક્સ - અંતિમ ભાગ)
by Hitesh Parmar

કહાની અબ તક: સ્વયોગ વિનાં ને એની જુની હવેલીમાં લઇ જાય છે. બંને ત્યાં ખુદને પ્રિન્સ અને પ્રિન્સેસ કહીને પ્યારથી વાતો કરે છે. પાછળથી એક પડછાઈ જાય છે તો ...

हॉंटेल होन्टेड - भाग - 27
by Prem Rathod

पहाड़ा के बीच घिरा हुआ अपने कुदरत की खूबसूरती की छाप छोड़ते हुए बसा हुआ एक खूबसूरत सा शहर। यह शहर जितना विकसित था, उतना ही खूबसूरत भी था, ...

श्रापित रंगमहल--भाग(१)
by Saroj Verma

मानसरोवर गाँव के बसस्टैंड पर बस रूकी और उसमें से श्रेयांश उतरा,उतरकर इधरउधर देखने लगा तभी उस के पास आकर एक व्यक्ति ने पूछा.... जी!कहीं आप चित्रकार श्रेयांश साहब ...

Revenge of the Ghost - 48
by Sunil Kapadia

The prayer was magical, and everybody was in a trance in a never-ending loop of tranquillity. The prayer was over but still no one opened their eyes. Their brains ...

खौफ की रातें - 6
by Rahul Haldhar

6) खौफ की रातउस दिन सुबह से ही मूसलाधार बारिश हो रहा था । रास्ता - घाट सब पानी से डूब गया था । लोग व वाहन चलाचल भी ...

नर्क - 8
by Priyansu Jain

निशा को आखिर पियूष के साथ आना ही पड़ा। उसकी एक भी दलील न चली। एक तो पियूष ने कोई बात मानी ही नहीं और दूसरे वहाँ जाना जरुरी ...

સ્ટ્રીટ નં - 69 - પ્રકરણ -21
by Dakshesh Inamdar

સ્ટ્રીટ નંબર 69 પ્રકરણ -21                હજી સોહમ વિચાર કરે છે કે આવી કેવી વિદ્યા...સાવીનો ચાલુ વાતે ફોન કટ થાય છે ત્યાંજ સુનિતા એનાં રૂમમાં આવીને કહ્યું “દાદા ...

दानव द रिस्की लव - 16
by Pooja Singh

….Now on ………अदिति : भैय्या.....आदित्य : अदि phone देख आज Monday है ……अदिति : हां है तो पर मुझे लगा आज Sunday है …… आप विवेक के यहां चले ...

ANSHNA PAHEREDARA pro occassion of the spooks - 3
by Nirav Vanshavalya

રાત્રિ નો મધ્ધમ અંધકાર છવાયેલો છે.અને અંશના તેના ખુલા કેશ સાથે રાજસી કવાડ ખોલી ને નીચે કોઇક ને અવાજ આપે છે. દૌડી ને રામલાલ સિંંગ નામ ના એક વયો ...

खौफ की रातें - 5
by Rahul Haldhar

5) भूतिया स्टेशनसुबह टेलीफोन की घंटी बज उठी , उस वक्त मैं आंख बंद कर आधे नींद में था। शायद सुबह के 10 बजने वाले थे । रात को ...

शैतानी दुनिया।
by Akash Saxena "Ansh"

"माँ रिषभ नानी के यहाँ से आया या नहीं।"जतिन आवाज़ लगाता हुआ घर मे घुसता है।"नहीं जतिन,ऋषि अभी तक नहीं आया बेटा, ज़रा ले आ जाकर उसको वहां से।जतिन ...

दानव द रिस्की लव - 15
by Pooja Singh

……Now on……विवेक अदिति को लेने घर पहुंचता है ……………Door bell ring ………बबिता : आप …!विवेक : बबिता अदिति कहां हैं ……!बबिता : वो अपने कमरे में आराम कर रही ...

खौफ की रातें - 4
by Rahul Haldhar

4) भूतशिव जलपान व मिष्ठान गृह हम दोस्तों के बैठकरदुनिया में व आसपास हो रहे कई प्रकार के बातकरने का एक बेहतरीन स्थान है । जिसका यहदुकान है उसका ...

સ્ટ્રીટ નં - 69 - પ્રકરણ -20
by Dakshesh Inamdar

સ્ટ્રીટ નંબર 69 પ્રકરણ -20           સોહમને સાવી સાથે વાત કરવી હતી પણ ખબર નહીં એને શું થયું એણે સાવીનો ફોન કાપી નાંખ્યો...સોહમ પોતે ના સમજી શક્યો કે ...

शापित गुड़िया - भाग ३
by Lalit Raj

तमन्ना अपने चारों ओर अंधेरा पाती है और बहुत डरी हुई सहमी हुई बैठी थी,उसकी लम्बी लम्बी सांसें चल रही थी,तभी एक गुड़िया उसकी तलफ आती है और शैतानी ...

नर्क - 7
by Priyansu Jain

'निशा भागे जा रही थी जंगल में, उसके पैर पत्थरों व कंकरों पर लहूलुहान हो रहे थे। अचानक उसके सामने एक परछाई बहुत तेजी से गुजरी। निशा रुकी, तब ...